भारतीय बैंकिंग और डिजिटल अर्थव्यवस्था के मोर्चे से एक बेहद ऐतिहासिक और गर्व करने वाली खबर सामने आई है। देश में वित्तीय क्रांति का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुकी प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) ने सफलता का एक नया कीर्तिमान रच दिया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को एक ऐलान करते हुए बताया कि देश में जनधन खातों की संख्या रिकॉर्ड 58 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है।
वित्त मंत्री के कार्यालय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर शेयर की गई जानकारी के मुताबिक, इन खातों ने न केवल करोड़ों वंचित भारतीयों को देश की औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा है, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर गरीबी और अभाव के खिलाफ लड़ाई में एक रोल मॉडल के रूप में खड़ा कर दिया है।
94% वयस्कों के पास अब अपना बैंक खाता
28 अगस्त, 2014 को लॉन्च की गई यह योजना आज दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहलों में से एक बन चुकी है। इसकी सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज भारत की 94 प्रतिशत वयस्क आबादी के पास अपना बैंक खाता है। इस योजना की सबसे खूबसूरत बात महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण भारत की भागीदारी है। कुल जनधन खाताधारकों में से 56 प्रतिशत महिलाएं हैं, जबकि 67 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में खोले गए हैं। इसने देश के सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले गरीबों को सीधे डिजिटल क्रांति का हिस्सा बना दिया है।
बिचौलियों का राज खत्म
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि जनधन खातों ने देश से भ्रष्टाचार और बिचौलियों के राज को पूरी तरह खत्म कर दिया है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए अब तक कल्याणकारी योजनाओं का रिकॉर्ड ₹45 लाख करोड़ बिना किसी लीकेज के सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जा चुका है। अब गरीब को मिलने वाली सरकारी मदद, कम लागत वाला बीमा और पेंशन का पैसा बिना किसी कटौती के सीधे उनके हाथ में पहुंच रहा है।
जीरो बैलेंस के साथ मिलती हैं ये शानदार सुविधाएं
- जीरो बैलेंस सुविधा: खाता चालू रखने के लिए न्यूनतम बैलेंस रखने का कोई झंझट नहीं।
- फ्री रूपे (RuPay) डेबिट कार्ड: जिसके जरिए देश में कहीं भी डिजिटल लेनदेन किया जा सकता है।
- मुफ्त दुर्घटना बीमा: रूपे कार्ड के साथ खाताधारकों को इनबिल्ट एक्सीडेंटल इंश्योरेंस कवर मिलता है।
- ओवरड्राफ्ट सुविधा: संकट के समय खाते से ₹10,000 तक की ओवरड्राफ्ट (लोन) निकालने की सहूलियत।